एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो।एह गिरि नी महिमा अनंत, कुण करे वखाण;चैत्री पूनमने दिने, तेह अधिको जाण।एह तीर्थ सेवों सदा, आणी भक्तिधार;श्री शत्रुंजय सुखदायको, दान विजय जयकार।
जैन धर्म में आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का एक महान और पवित्र साधन हैं । जैन धर्म के शाश्वत तीर्थ शत्रुंजय महातीर्थ (पालीताना) की भावपूर्ण यात्रा करते समय ५ प्रमुख चैत्यवंदन किए जाते हैं। यह चैत्यवंदन व्यक्ति के कर्मों को क्षय करने और अनंत पुण्य अर्जित करने में सहायक माने जाते हैं। palitana 5 chaityavandan in hindi full
- तृतीय चैत्यवंदन एह गिरि ऊपर आदिदेव
पुंडरीक मंडन पाय प्रणमी जे,आदिनाथ जिणचंदजी;नेम विना चोवीस वंदूं,गिरि चढ्या आनंदजी।आगम मांहि पुंडरीक महिमा,भाख्यो ज्ञान दिवाणजी;चैत्री पूनम दिन देवी चक्केसरी,सौभाग्य द्यो सुखकंदजी। प्रभु प्रतिमा वंदो
शांति जिनेश्वर सोलमा, अचिरा सुत वंदो;विश्वसेन कुल नभोमणी, भविजन सुख कंदो।मृग लांछन जिन आयुखूं, लाख वरस प्रमाण;हत्थिनापुर नगरी धणी, प्रभुजी गुण मणिखाण।