यह कानून 1 जुलाई, 1914 को लागू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार या अधिसूचित संस्थानों (जैसे बैंक या निगम) की बकाया राशि, जिसे "सार्वजनिक मांग" (Public Demand) कहा जाता है, की वसूली के लिए एक प्रभावी और तेज प्रशासनिक प्रक्रिया प्रदान करना था। यह अधिनियम मुख्य रूप से बिहार और उड़ीसा (अब ओडिशा) के क्षेत्रों के लिए बनाया गया था, लेकिन झारखंड राज्य बनने के बाद वहां भी इसे संशोधनों के साथ अपनाया गया है।
अधिनियम को विभिन्न भागों में विभाजित किया गया है जो वसूली की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हैं: यह कानून 1 जुलाई
जब अधिकारी संतुष्ट हो जाता है कि राशि बकाया है, तो वह एक प्रमाणपत्र (Certificate) जारी करता है। इसके बाद देनदार को धारा 7 के तहत एक नोटिस भेजा जाता है, जो वसूली की कार्यवाही की शुरुआत होती है। अनुमंडल पदाधिकारी (SDO)
अधिनियम के तहत मुख्य शक्ति सर्टिफिकेट ऑफिसर के पास होती है। इसमें कलेक्टर, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), या सरकार द्वारा नियुक्त कोई अन्य अधिकारी शामिल हो सकता है। यह कानून 1 जुलाई
Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914
इसके अंतर्गत भू-राजस्व, कर (Tax), शुल्क, रॉयल्टी, और बैंकों द्वारा दिए गए ऋण (यदि अधिसूचित हो) जैसी राशियाँ शामिल हैं। हाल ही में पटना हाईकोर्ट ने माना कि एनआई एक्ट के तहत अंतरिम मुआवजा भी "सार्वजनिक मांग" माना जा सकता है।
एक ऐतिहासिक कानून है जो आज भी बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में सरकारी बकाया राशि की त्वरित वसूली के लिए आधार स्तंभ बना हुआ है। इसे अक्सर PDR Act के नाम से जाना जाता है।
यह कानून 1 जुलाई, 1914 को लागू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार या अधिसूचित संस्थानों (जैसे बैंक या निगम) की बकाया राशि, जिसे "सार्वजनिक मांग" (Public Demand) कहा जाता है, की वसूली के लिए एक प्रभावी और तेज प्रशासनिक प्रक्रिया प्रदान करना था। यह अधिनियम मुख्य रूप से बिहार और उड़ीसा (अब ओडिशा) के क्षेत्रों के लिए बनाया गया था, लेकिन झारखंड राज्य बनने के बाद वहां भी इसे संशोधनों के साथ अपनाया गया है।
अधिनियम को विभिन्न भागों में विभाजित किया गया है जो वसूली की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हैं:
जब अधिकारी संतुष्ट हो जाता है कि राशि बकाया है, तो वह एक प्रमाणपत्र (Certificate) जारी करता है। इसके बाद देनदार को धारा 7 के तहत एक नोटिस भेजा जाता है, जो वसूली की कार्यवाही की शुरुआत होती है।
अधिनियम के तहत मुख्य शक्ति सर्टिफिकेट ऑफिसर के पास होती है। इसमें कलेक्टर, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), या सरकार द्वारा नियुक्त कोई अन्य अधिकारी शामिल हो सकता है।
Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914
इसके अंतर्गत भू-राजस्व, कर (Tax), शुल्क, रॉयल्टी, और बैंकों द्वारा दिए गए ऋण (यदि अधिसूचित हो) जैसी राशियाँ शामिल हैं। हाल ही में पटना हाईकोर्ट ने माना कि एनआई एक्ट के तहत अंतरिम मुआवजा भी "सार्वजनिक मांग" माना जा सकता है।
एक ऐतिहासिक कानून है जो आज भी बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में सरकारी बकाया राशि की त्वरित वसूली के लिए आधार स्तंभ बना हुआ है। इसे अक्सर PDR Act के नाम से जाना जाता है।